शनिवार 2 मई 2026 - 08:55
ईरान को शहीद लारीजानी जैसे जिम्मेदारों की सख्त जरूरत हैः हुज्जतुल इस्लाम हामिद काशानी

शहीद हकीम और क्रांतिकारी सियासतदार डॉ. अली लारीजानी, उनके बेटे शहीद डॉ. मुर्तज़ा लारीजानी और उनके साथी शहीदों के चेहलुम की शोक सभा 1 मई 2026 को हज़रत फातिमा मासूमा (स) की पवित्र दरगाह में संपन्न हुई। यह शोक सभा शहीद उस्ताद मुर्तज़ा मुतह्हरी (र) की शहादत की बरसी के दिन थी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद हकीम और क्रांतिकारी सियासतदार डॉ. अली लारीजानी, उनके बेटे शहीद डॉ. मुर्तज़ा लारीजानी और उनके साथी शहीदों के चेहलुम की मजलिस 1 मई 2026 को हज़रत फातिमा मासूमा (स) की पवित्र दरगाह में संपन्न हुई। यह शोक सभा शहीद उस्ताद मुर्तज़ा मुतह्हरी (र) की शहादत की बरसी के दिन थी। जिसमे जामेअ मुदर्रेसीन, ख़ुबरगान-ए-रहबरी के सदस्य, इस्लामी सलाह परिषद के प्रतिनिधि, हौज़ा इल्मिया के जिम्मेदार, मराजे-ए-तक़लीद के प्रतिनिधि और विद्वान, प्रांतीय अधिकारी उपस्थित थे।

मजलिस के खतीब हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन हामिद काशानी ने शहीद डॉ. अली लारीजानी के व्यक्तित्व, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह शहीद जटिल मसलों को आम जनता के सामने स्पष्ट करने की अद्वितीय क्षमता रखता था और संवेदनशील परिस्थितियों में अस्पष्टता के माहौल को प्रबंधित कर सकता था - एक ऐसा गुण जिसकी आज हमें पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

शहीद लारीजानी के मजलिस ए चेहलुम की वीडियो

हुज्जतुल इस्लाम काशानी ने शहीद मुतह्हरी की इल्मी हैसियत की तारीफ करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व दुनिया-ए-इस्लाम के विरल विद्वानों में था। उन्होंने शहीद लारीजानी को मजबूत धार्मिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि का धनी बताया जो हौज़ा इल्मिया से जुड़ी थी। उन्होंने कहा कि अमीरुल मोमिनीन (अ) के अनुसार कार्यकर्ताओं का चुनाव करते समय मूल और परिवार की शुद्धता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, और शहीद लारीजानी इस मामले में एक स्पष्ठ उदाहरण थे।

मजलिस के खतीब हामिद काशानी ने बताया कि मीडिया द्वारा प्रभावित होने के कारण वह स्वयं शहीद लारीजानी के कठोर आलोचकों में से थे, लेकिन जब उनकी कई घंटे की व्यक्तिगत बातचीत हुई, तो उन्हें एक अलग ही व्यक्तित्व मिला - एक व्यापक जानकारी रखने वाला, चतुर, और आलोचनाओं को सुनने वाला धैर्यशाली व्यक्ति। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश का मीडिया और राजनीतिक वातावरण झूठ, अफवाहें, और जल्दबाजी में फैसले करने से दूषित है, और अक्सर वास्तविकता से दूर तस्वीर पेश की जाती है।

उन्होने शहीद लारेजानी की कुछ विशेषताओ का उल्लेख करते हुए कहा कि शहीद लारेजानी का हौज़ा से जुड़ाव केवल दिखावटी नहीं था, बल्कि वास्तविक और गहरा था। उनका कहना था कि वह हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि धर्म और राजनीति का विश्लेषण करते समय भावुकता से बचना चाहिए। शहीद ने पूरी जानकारी और जान के खतरे के बावजूद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी को स्वीकार किया। उनकी सबसे सर्वोच्चतम विशेषता यह थी कि शहीद नमाज़े शब पढ़ने के अलावा,  रजब, शाबान और रमज़ान के महीनों में रोज़े रखने, क़ुरआन की तिलावत और अहले-बैत (अ) से मुहब्बत के लिए जाने जाते थे।

हुज्जतुल इस्लाम काशानी ने साफ किया कि देश को उन्हीं जिम्मेदारों की जरूरत है जो शहीद लारीजानी की तरह जनता से प्रभावी संवाद कर सकें। उन्होंने कहा कि शहादत के बाद दुनिया-ए-इस्लाम के सैकड़ों विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने इस वाकये पर प्रतिक्रिया दी, जो उनके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दिखाता है।

अंत में उन्होंने शहीदों के परिवारों के उच्च दर्जे को याद करते हुए कहा कि शहीद मुर्तज़ा लारीजानी ने अपने वैज्ञानिक दर्जे के बावजूद अपने पिता के साथ रहकर और उनकी सेवा करके खुद एक अमूल्य विरासत छोड़ी।

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